✍️ कविता (Poetry)
🇮🇳 हिन्दी
माटी की सौंधी खुशबू
रचनाकार: सतेन्द्र सिंह (Satender Kavi) • 19 Oct 2026
पंक्ति संरेखण (Alignment):
खेतों की हरी चुनरिया पर
जब पहली बूँद उतरती है,
हरियाणा की इस पावन माटी से
सौंधी महक उभरती है।
हल की नोक पे थिरके जीवन,
मेहनत का पसीना चंदन है,
यहाँ सांझ-सवेरे चौपालों में
राधा-माधव का वंदन है।
रागिनी के सुर में गूंज रहा
वीरों का अनुपम बलिदान,
यह कुंज हमारा गौरव है,
साहित्य का पावन तीर्थ-स्थान।
जब पहली बूँद उतरती है,
हरियाणा की इस पावन माटी से
सौंधी महक उभरती है।
हल की नोक पे थिरके जीवन,
मेहनत का पसीना चंदन है,
यहाँ सांझ-सवेरे चौपालों में
राधा-माधव का वंदन है।
रागिनी के सुर में गूंज रहा
वीरों का अनुपम बलिदान,
यह कुंज हमारा गौरव है,
साहित्य का पावन तीर्थ-स्थान।
à
सतेन्द्र सिंह (Satender Kavi)
हरियाणवी लोकसंस्कृति, रागिनी, मुक्तक और गीतों के रचनाकार।
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