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हरियाणा कुंज
साहित्य, कविता और विचारों का स्वतंत्र मंच
कवियों, विचारकों और लोकसाहित्य के साधकों के लिए समर्पित मंच। रागिनी, दोहा, कविता, गज़ल और समकालीन निबंधों का सम्मानित संकलन।
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🇮🇳 हिन्दी
कविता (Poetry)
माटी की सौंधी खुशबू
रचनाकार: सतेन्द्र सिंह (Satender Kavi)
खेतों की हरी चुनरिया पर
जब पहली बूँद उतरती है,
हरियाणा की इस पावन माटी से
सौंधी महक उभरती है।
जब पहली बूँद उतरती है,
हरियाणा की इस पावन माटी से
सौंधी महक उभरती है।
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कविता • कविता (Poetry)
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माटी की सौंधी खुशबू
हरियाणा के खेतों, पसीने की खुशबू और सांझी चौपालों पर रची गई भावपूर्ण कविता।
सतेन्द्र सिंह (Satender Kavi)
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लेख • संस्कृति, इतिहास व विचार (Heritage & Culture)
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हरियाणा की रागिनी परंपरा: लोकसाहित्य का अनुपम दर्पण
दादा लखमी चंद और सांग विधा के माध्यम से हरियाणा की लोक चेतना और आध्यात्मिक दर्शन की पड़ताल।
पंडित विद्याधर शर्मा (Chief Editor)
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